
पहले डायपर की सॉलिड पॉटी टॉयलेट में झाड़ें। डायपर या वाइप्स कभी फ्लश न करें, चाहे पैक पर "फ्लशेबल" लिखा हो। फिर डायपर को आगे से पीछे की तरफ़ कसकर रोल करें, इस्तेमाल किए वाइप्स उसी के अंदर रखें, टेप से सील करें, और ढक्कन वाले बिन या बंधे हुए बैग में डालें। आख़िर में साबुन से कम से कम 20 सेकंड हाथ धोएं।
नियम एक ही है: पॉटी टॉयलेट में, बाकी सब बिन में।
डायपर और वाइप्स कभी फ्लश न करें। ये टॉयलेट पेपर की तरह नहीं घुलते और पाइप, सेप्टिक टैंक और सीवर जाम कर देते हैं।
डायपर जलाएं नहीं। इससे ज़हरीली गैसें निकलती हैं और आग का ख़तरा भी रहता है।
हर बार 20 सेकंड साबुन से हाथ धोएं, चाहे लगे कि आपने कुछ छुआ ही नहीं।
सॉलिड पॉटी टॉयलेट में डालना सिर्फ़ सफ़ाई की बात नहीं है। भारत में यह कदम कचरा बीनने वालों और सफ़ाई कर्मचारियों की सेहत की सीधी सुरक्षा है।
अलग-अलग तरह के डायपर अलग तरीके से डिस्पोज होते हैं, लेकिन बुनियादी नियम एक ही है: सॉलिड पॉटी टॉयलेट में, बाकी सब बिन में।
डिस्पोजेबल डायपर: लपेटकर, सील करके, ढक्कन वाले बिन में
क्लॉथ डायपर: सॉलिड टॉयलेट में झाड़कर, धुलाई तक ड्राई पेल या वेट बैग में
नवजात रोज़ 8 से 12 बार डायपर बदलवाते हैं, इसलिए यह दिन में दस बार दोहराया जाने वाला काम है। एक बार सही आदत बन जाए तो इसमें दस सेकंड से ज़्यादा नहीं लगते।
क्या | फ्लश करें? | क्यों |
|---|---|---|
सॉलिड पॉटी (मल) | हां | इंसानी मल सीवेज सिस्टम के लिए ही बना है, लैंडफिल के लिए नहीं |
डायपर | कभी नहीं | घुलता नहीं, पाइप और पंप ब्लॉक करता है |
डायपर का जेल | कभी नहीं | पानी में फूलकर और बड़ा हो जाता है |
बेबी वाइप्स | कभी नहीं | टॉयलेट पेपर की तरह नहीं घुलते |
"फ्लशेबल" लिखे वाइप्स | कभी नहीं | लेबल के बावजूद ये सीवर जाम की बड़ी वजह हैं |
कॉटन बॉल या पैड | कभी नहीं | बिन में डालें |
याद रखने का आसान तरीका: टॉयलेट में सिर्फ़ वही जाता है जो शरीर से निकला है, और टॉयलेट पेपर। बाकी सब बिन में।
बदलने की जगह के पास ढक्कन वाला बिन, डायपर पेल या डिस्पोजल बैग रखें, और उसे खाने-पीने और सोने की जगह से दूर रखें। बिन में लाइनर लगाएं ताकि खाली करना आसान हो। बच्चे को कभी अकेला छोड़कर सामान लेने न जाएं।
अगर बच्चे ने पॉटी की है तो सॉलिड को टॉयलेट में झाड़ दें। रास्ते में दूसरी सतहों को न छुएं।
सिर्फ़ दूध पीने वाले नवजात की पॉटी नरम और चिपकी हुई होती है, उसे हमेशा झाड़ पाना संभव नहीं। यह ठीक है, ऐसे में सीधे सील करके बिन में डालें।
डायपर को आगे से पीछे की तरफ़ कसकर रोल करें। इस्तेमाल किए वाइप्स उसी रोल के अंदर रखें, फिर डायपर के अपने टेप या साइड पैनल से कसकर बंद कर दें।
पैंट स्टाइल डायपर में साइड फाड़कर खोलें, फिर उसी तरह रोल करके, टेप या बैग से बंद करें।
सील किया डायपर सीधे ढक्कन वाले बिन या डायपर पेल में डालें। इस्तेमाल किया डायपर कभी खुला न छोड़ें, न बिस्तर पर, न बालकनी में, न बाथरूम के कोने में।
साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड हाथ धोएं, चाहे आपने दस्ताने पहने हों या लगे कि कुछ नहीं छुआ। बदलने की सतह भी पोंछ दें।
यह वह स्थिति है जहां ज़्यादातर पैरेंट्स अटकते हैं। तैयारी से यह आसान हो जाता है।
जगह | क्या करें |
|---|---|
कार या ट्रेन में | डायपर बैग में हमेशा 3 से 4 डिस्पोजल या डॉगी बैग रखें। सील करके बैग में बांधें, अगले स्टॉप के बिन में डालें |
मॉल या रेस्तरां | बेबी चेंजिंग रूम के बिन में डालें। न हो तो सील करके बाथरूम के ढक्कन वाले बिन में |
किसी के घर पर | कभी उनके खुले बिन में न डालें। सील करके बैग में रखें और अपने साथ ले जाएं |
फ्लाइट में | एयरलाइन के लैवेटरी बिन में। टॉयलेट में कभी नहीं, विमान का सिस्टम वैक्यूम पर चलता है और तुरंत ब्लॉक हो जाता है |
पार्क या बाहर | सील करके साथ ले जाएं। खुले में या झाड़ी में कभी न छोड़ें |
यह डर लगता है पर आम बात है, ख़ासकर तब जब डायपर बहुत भर गया हो या बहुत देर पहना रहा हो।
सूखे कपड़े या झाड़ू से इकट्ठा करें, गीले कपड़े से नहीं। पानी लगते ही ये दाने और फूल जाते हैं।
कचरे में डालें, नाली में नहीं। ये दाने पाइप में जाकर फूलते हैं और ब्लॉकेज बना सकते हैं।
बच्चे की त्वचा से पोंछकर हटाएं और उस जगह को गुनगुने पानी से धो दें।
आंख में चला जाए तो साफ़ पानी से अच्छी तरह धोएं और डॉक्टर से सलाह लें।
बच्चा मुंह में डाल ले तो मुंह साफ़ करें और अपने बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें।
बचाव: डायपर को बहुत देर तक न पहनाएं और सही साइज़ चुनें। सही साइज़ के लिए डायपर साइज़ और वज़न चार्ट देखें।
यही वह समय है जब डायपर डिस्पोजल सबसे ज़्यादा मायने रखता है, क्योंकि रोटावायरस जैसे संक्रमण डायपर बदलने के दौरान ही सबसे तेज़ी से फैलते हैं।
हर डायपर डबल बैग करें
बदलने की सतह हर बार साफ़ करें, सिर्फ़ पोंछें नहीं
बिन दिन में कम से कम एक बार खाली करें
हाथ धोने में और सावधानी बरतें, और घर के बाकी लोगों को भी बताएं
बच्चे के तौलिए और कपड़े अलग धोएं
अगर घर में किसी और को भी दस्त या उल्टी शुरू हो जाए, तो डॉक्टर से मिलें
तरीका | कैसे मदद करता है | ध्यान रखें |
|---|---|---|
डायपर पेल | सील कंटेनर, बदबू अंदर रखता है | नियमित खाली और साफ़ करें |
डिस्पोजल या डॉगी बैग | पोर्टेबल, बदबू सील करते हैं | डायपर बैग और सफ़र के लिए सबसे अच्छे |
डायपर डिस्पोजल मशीन | हर डायपर को अलग लपेट देती है | सुविधाजनक है, ज़रूरी नहीं |
ढक्कन वाला बिन और लाइनर | सबसे आसान और सस्ता | ढक्कन ठीक से बंद होना चाहिए |
वेट बैग या ड्राई पेल | क्लॉथ डायपर के लिए, धुलाई तक | पहले सॉलिड झाड़ें, गीला बंद करके न रखें |
नहीं। डायपर जलाने से ज़हरीली गैसें और केमिकल निकलते हैं जो सांस के ज़रिए अंदर जाते हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। आग फैलने का ख़तरा अलग है।
भारत में घर के पीछे या गली के कोने में कचरा जलाना आम है, लेकिन डायपर में प्लास्टिक और सुपर अब्ज़ॉर्बेंट पॉलिमर दोनों होते हैं और ये खुले में जलने पर हानिकारक धुआं छोड़ते हैं।
संक्रमण फैलना, ख़ासकर पेट के संक्रमण
E. coli जैसे हानिकारक बैक्टीरिया का फैलाव
सतहों और हाथों का दूषित होना, जो फिर खाने या बच्चे को छूते हैं
सफ़ाई कर्मचारियों और कचरा बीनने वालों तक बीमारी पहुंचना, जो अक्सर बिना दस्ताने के कचरा छांटते हैं
यह आख़िरी बिंदु भारत में सबसे ज़्यादा मायने रखता है। खुला, बिना सील किया डायपर उस व्यक्ति के हाथ में जाता है जिसके पास कोई सुरक्षा नहीं होती। सॉलिड पॉटी टॉयलेट में डालना और डायपर सील करना, ये दो छोटे कदम सीधे किसी और की सेहत बचाते हैं।
समस्या | कारण | क्या करें |
|---|---|---|
बिन से लगातार बदबू | डायपर सील किए बिना डाले जा रहे हैं | हर डायपर रोल करके टेप से बंद करें |
गर्मी में बदबू और मक्खियां | बिन रोज़ खाली नहीं हो रहा | गर्मी और उमस में रोज़ खाली करें, हफ़्ते में एक बार धोएं |
बिन के नीचे से रिसाव | लाइनर नहीं है, या डायपर बहुत गीला डाला गया | हमेशा लाइनर लगाएं, भारी डायपर अलग बैग में बांधें |
टॉयलेट बार-बार जाम | वाइप्स फ्लश किए जा रहे हैं | वाइप्स कभी फ्लश न करें, बाथरूम में छोटा ढक्कन वाला बिन रखें |
सफ़र में डायपर रखने की जगह नहीं | डिस्पोजल बैग साथ नहीं हैं | डायपर बैग में हमेशा 3 से 4 बैग रखें |
पॉटी झाड़ते समय हाथ गंदे हो जाते हैं | डायपर को सीधे उलटा जा रहा है | डायपर को टॉयलेट के ऊपर पकड़कर झाड़ें, या फ्लशेबल लाइनर इस्तेमाल करें |
क्लॉथ डायपर के पेल से बदबू | गीला बंद करके रखा है | ड्राई पेल इस्तेमाल करें, पहले खंगालें, रोज़ धोएं |
डिस्पोजेबल डायपर घरेलू कचरे का बड़ा हिस्सा हैं और लैंडफिल में बहुत लंबे समय तक रहते हैं। क्लॉथ डायपर लैंडफिल कचरा कम करते हैं, लेकिन धुलाई में पानी, बिजली और डिटर्जेंट लगते हैं। कोई भी विकल्प पूरी तरह "ग्रीन" नहीं है।
जो छोटे कदम असल में फ़र्क़ डालते हैं:
हमेशा सॉलिड पॉटी टॉयलेट में डालें, ताकि मल लैंडफिल तक न पहुंचे
सही साइज़ चुनें, क्योंकि गलत साइज़ लीक करता है और डायपर बर्बाद होते हैं
दिन में घर पर क्लॉथ और रात व सफ़र में डिस्पोजेबल, यह हाइब्रिड तरीका ज़्यादातर भारतीय परिवारों के लिए व्यावहारिक है
अगर आप कचरा कम करना चाहती हैं, तो Mylo के रीयूजेबल क्लॉथ डायपर एक विकल्प हैं, जो 3 महीने से 3 साल तक चलते हैं। ध्यान रखें कि इनमें रोज़ धुलाई और सुखाई का काम जुड़ता है।
सॉलिड पॉटी टॉयलेट में डालना सबसे ज़िम्मेदार कदम है, क्योंकि भारत में इस्तेमाल किए डायपर अक्सर आम घरेलू कचरे में जाते हैं और वहां से सीधे कचरा बीनने वालों तक पहुंचते हैं।
वाइप्स फ्लश करने की आदत आम है, और यह घर की नालियों और मोहल्ले के सीवर दोनों को ब्लॉक करती है।
गर्मी और उमस में बिन रोज़ खाली करें, वरना बदबू और मक्खियां दोनों बढ़ती हैं।
खुले में डायपर जलाना बिल्कुल न करें, चाहे आसपास ऐसा होता हो।
गीले और सूखे कचरे के अलग डिब्बे वाले शहरों में डायपर सूखे या "अन्य" कचरे में जाता है, कंपोस्टेबल कचरे में नहीं। अपने नगर निगम के नियम देख लें।
डायपर बैग में डिस्पोजल बैग रखने की आदत डालें, क्योंकि भारत में हर जगह चेंजिंग रूम और बिन नहीं मिलते।
मिथक | सच्चाई |
|---|---|
पूरा डायपर टॉयलेट में फ्लश कर सकते हैं | कभी नहीं। सिर्फ़ पॉटी टॉयलेट में, डायपर बिन में |
"फ्लशेबल" वाइप्स फ्लश करना सुरक्षित है | ये घुलते नहीं और नालियां ब्लॉक करते हैं |
इस्तेमाल किए डायपर जलाना ठीक है | जलाने से ज़हरीली गैसें निकलती हैं |
डायपर डिस्पोजल मशीन ज़रूरी है | ढक्कन वाला बिन और बैग भी उतने ही असरदार |
हाथ पर कुछ न लगे तो धोना ज़रूरी नहीं | हर बार 20 सेकंड साबुन से हाथ ज़रूर धोएं |
क्लॉथ डायपर पूरी तरह ईको फ्रेंडली हैं | धुलाई में पानी, बिजली और डिटर्जेंट लगते हैं |
जेल के दाने ज़हरीले होते हैं | मुख्य ख़तरा ब्लॉकेज और आंख या मुंह में जाने का है। बिखर जाएं तो सूखे कपड़े से हटाएं |
डायपर को टॉयलेट में फ्लश कर सकते हैं क्या?
नहीं, कभी नहीं। डायपर और उसका जेल घुलते नहीं और पाइप व सेप्टिक सिस्टम ब्लॉक कर देते हैं। सिर्फ़ सॉलिड पॉटी फ्लश होती है।
Diaper ki potty toilet mein daalni zaroori hai kya? (Hinglish)
Haan, jab tak possible ho. Isse do fayde hain: landfill mein mal nahi jaata, aur badbu v keetanu dono kam hote hain. Sabse zaroori, jo log kachra chhaante hain unke liye risk kam hota hai. Sirf doodh peene wale newborn ki potty naram hoti hai, use hamesha jhaad paana mumkin nahi, tab seedha seal karke bin mein daalein.
डायपर बिन की बदबू कैसे रोकें?
हर डायपर सील करके डालें, बिन में लाइनर लगाएं, और गर्मी में बिन रोज़ खाली करें। ज़्यादा बदबू वाले डायपर को डबल बैग करें। कंटेनर से ज़्यादा फ़र्क़ नियमित खाली करने से पड़ता है।
क्या डायपर पेल या डिस्पोजल मशीन खरीदना ज़रूरी है?
नहीं। ये सुविधाजनक हैं, पर ढक्कन वाला बिन, लाइनर और बंधे हुए बैग भी उतने ही असरदार हैं।
Safar mein ganda diaper kahan phenke? (Hinglish)
Diaper bag mein hamesha 3 se 4 disposal ya doggy bag rakhein. Diaper roll karke seal karein, bag mein baandhein, aur agle bin mein daalein. Kisi ke ghar par unke khule bin mein na daalein. Flight mein hamesha lavatory bin, toilet mein bilkul nahi.
डायपर फट गया और जेल के दाने बिखर गए, क्या करूं?
सूखे कपड़े या झाड़ू से इकट्ठा करें, गीले से नहीं, क्योंकि पानी लगते ही ये और फूल जाते हैं। कचरे में डालें, नाली में नहीं। आंख में जाए या बच्चा मुंह में डाल ले तो डॉक्टर से बात करें।
बच्चे को दस्त हैं, कुछ अलग करना चाहिए?
हां। हर डायपर डबल बैग करें, बदलने की सतह हर बार साफ़ करें, बिन रोज़ खाली करें और हाथ धोने में और सावधानी बरतें। पेट के संक्रमण डायपर बदलने के दौरान ही सबसे तेज़ी से फैलते हैं।
क्लॉथ डायपर की गंदगी का क्या करें?
सॉलिड टॉयलेट में झाड़ें, फिर इन्सर्ट को बहते पानी में तब तक खंगालें जब तक पानी साफ़ न आए। धुलाई तक ड्राई पेल या वेट बैग में रखें।
घर में किसी को लगातार दस्त, उल्टी या संक्रमण के लक्षण हों
बच्चे को दस्त के साथ बुखार हो, या पॉटी में खून दिखे
गीले डायपर अपेक्षा से बहुत कम हों, साथ में मुंह सूखना, सिर की नरम जगह धंसना या असामान्य सुस्ती
डायपर के जेल के दाने बच्चे की आंख में चले जाएं, या बच्चा उन्हें निगल ले
डायपर एरिया पर ऐसा रैश जो कुछ दिनों में ठीक न हो, या जिसमें छाले, पस या खून हो
डायपर डिस्पोजल का पूरा नियम एक लाइन में आ जाता है: पॉटी टॉयलेट में, बाकी सब सील करके बिन में, फिर 20 सेकंड हाथ धोएं। डायपर या वाइप्स कभी फ्लश न करें और डायपर कभी जलाएं नहीं। सफ़र के लिए डायपर बैग में हमेशा कुछ डिस्पोजल बैग रखें। ये छोटी आदतें आपके घर की सफ़ाई ही नहीं, उन लोगों की सेहत भी बचाती हैं जो आपका कचरा संभालते हैं।
डायपर बदलने और साफ़ करने के लिए
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कचरा कम करना चाहती हैं?
Mylo रीयूजेबल क्लॉथ डायपर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। अगर घर में किसी को लगातार दस्त, उल्टी या संक्रमण के लक्षण हों, तो डॉक्टर से मिलें।




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